Wednesday, February 18, 2009

कभी ..

कभी तोह तुम आओगे , कभी तोह यह शाम अधूरी न लगेगी।
कभी तोह जी भर के बातें करेंगे , कभी तोह बंदिश टूटेगी।

दिन रात का ठिकाना न होगा , इंतज़ार का येही फल्सफ्हा होगा।
गर तुम साथ होगे, इस दुनिया से डर न होगा ।

इस राह पर जो हम चल पड़े , कुछ पल यादों में समेटे ओझल हो चलें ।
आँखें मूँद कर कल को दिल में समां लूँ , आने वाले हर दिन की शुरुवात अभी से सजा लूँ ।

इस छोटी सी ज़िन्दगी के इतने अरमान ,
बस इंतज़ार है की ख़त्म हो चाहत का इम्तिहान।

3 comments:

blaze111 said...

Not every one blogs in a another language... And its all about love... so ITS SWEEEEEEEEET!

bhavika said...

wah wah!! :P

snigdha said...

thank u..dhanyawaad..shukriya