Saturday, April 21, 2007

वाह!!!!!


मैंने एक नया , निराला , निष्पक्ष -निर्माण देखा,
यह ब्लोग, जो अब तक अंग्रेजी से वाकिफ़ था , उसने अपनी देश भाषा का चेहरा देखा।

" कुछ तोह लिखो...!!" यह मन मेरा मुझसे कहे है ,
अब तक लोगों ने अंगेजी में सहा...अब हिंदी में सहेंगे।

दिल कि आशा को, यूं मैंने सत्य होता पाया॥
जादू कि तरह अंग्रेजी को हिंदी के रंग में ढलता पाया ...

मैं यहाँ कंप्यूटर के सामने अपनी आंखों को tikaye रखी हूँ ,
पर झारोखे से barkha कि बूंदों को baraste देख रहीं हूँ ।

उस खुले आकाश कि उन्चयिओं को nanhi बूँदें , छू रहीं हैं ,
मुझे अपना sathi banaane का वादा kar रहीं हैं...

panchien udd के आज़ादी को जान rahen हैं,
kaley badalon के samaksh अपनी udaan pehchan रहे हैं...

कुछ दो या चार shabd हैं जो यह कंप्यूटर भी नही समझ paataa।
सोच mein हूँ कि इतने सुन्दर shabd भी नहीं जानता?।

तोह fir चलते हैं ,
क्या hinglish में कविता का काम?

मगर धन्यवाद उनका जिन्होंने दिया is ब्लोग post को अंजाम ।


~ < Transliteration is yet not very efficient...but I loved writing this post! It took a great deal of patience for me to write it..and patience is what I'm still trying to make mine..>






No comments: